रंग सारे उदास पानी के,
बस रहें आस-पास पानी के।

ओक भी है उदास औ' लब भी,
प्यास बैठी है पास पानी के।

आँख छलकी हुयी हैं औ दिल भी,
हमसे रिश्ते हैं खास पानी के।

तेरा साया सदा निकलता है,
यूँ पहन कर लिबास पानी के।

आज पानी की है कमी ज़्यादा,
यूँ न टुकड़े तराश पानी के।

बस वतन के लिये ही लिखते हैं,
नृत्य पानी के, रास पानी के।

आज पानी का खत़्म है पानी,
दर्द भी हैं उदास पानी के।