हक़ीक़त हो गयी उसको पता तो,
हुआ वो बेसबब हमसे ख़फ़ा तो।

अँधेरे में कोई ग़फ़लत न करना,
वहाँ भी देखता होगा ख़ुदा तो।

ज़रा- सा खोलकर रखना दरीचे,
इधर आयी अगर बादे -सबा तो।

सुलह का रास्ता मालूम तो है,
नहीं माना किसी ने मशविरा तो।

उसे ख़ामोश रहने की क़सम है,
मगर नज़रों से ही कुछ कह दिया तो।

मुझे सूरत का अंदाज़ा कहाँ था,
नहीं होता अगर ये आइना तो।

स्वरूप अब साथ अपने भी रहाकर,
सफ़र में ज़िन्दगी के खो गया तो।