अभी- अभी रात ने
अपनी काली जुल्फों को समेटा है
अभी- अभी रात ने
अपनी बांहों के बंधन ढीले किए हैं

अभी- अभी सूरज निकला है
उसकी जुल्फों की घनी छांव से
उसकी बांहों के कोमल बंधन से
दुल्हन रात के माथे का रक्तिम सिंदूर
गौरांग सूरज के चेहरे पर पुत गया है
इसीलिए उसका चेहरा लाल हो गया है