जो बेक़सों पे सितम बार-बार करते हैं,
वक़ारे इंस को वो दाग़दार करते हैं।।

ज़फ़ापरस्त जिला लाते हैं जफ़ाओं में,
वफ़ापरस्त वफ़ा इख्तियार करते हैं।।

वो ज़ोर अपना दिखाते हैं नातवानों पर,
तो ज़ालिमों में हम उनका शुमार करते हैं।।.

हयाते इंस को बेशक़ जो जौफ़िशा करदे,
ग़मो के लम्हे वो पैदा शियार करते हैं।।

वो वादा करके नहीं आए आज तक लेकिन,
हमारा ज़र्फ़ कि हम इंतज़ार करते हैं।।

मेरी ख़ताओं को इस तर्ह दर गुज़र करके,
हक़ीक़तन वो मुझे शर्मसार करते हैं।।

ये बात सोचके मूसा का ज़हन है बेचैन,
चिराग़ कैसे हवा का शिकार करते हैं।।