कितने गीत अनसुने गाये।
कितने मीत अनकहे पाये ।
कितनी आशाएं टूटी और
कितने सपने हुए पराये।
मस्त कबीरा कैसे गाये ।

बचपन को अठखेली समझा।
यौवन को रंगरेली समझा।
जीवन की आपाधापी को
सच्ची सखी सहेली समझा।
सूरज अस्तांचल पहुंचा तो
लम्बे हुए विरह के साये।
मस्त कबीरा कैसे गाये ।

रिश्तों की सब मर्यादाओं में।
जीवन की सब बाधाओं में ।
रुक्मणी की पीड़ाएं भूली
जग की झूठी राधाओं में ।
हर चौराहे खड़ी द्रौपदी,
कितने कान्हा चीर बढ़ाए ।
मस्त कबीरा कैसे गाये ।

उंची मस्जिद बहरा अल्ला।
बैर भाव का बसा मुहल्ला ।
राम के पथ को खोज रही है
सरयू की प्यासी कौशल्या।
दीन धरम के अँधियारे को
सच का सूरज कौन दिखाये।
मस्त कबीरा कैसे गाये ।

नर्तन करती मस्त निशाएं।
मद मोदित मन अभिलाषाएं।
मन के झूठे वृंदावन में
कौन सुने तुलसी की आहें
जिसमें आंसू की दुल्हन हो
उस डोली को कौन उठाए ।
मस्त कबीरा कैसे गाये ।

शापित मगहर से जीवन को
काशी में क्या मुक्ति मिलेगी।
लाक्षागृह में फंसी इन्द्रियों को
किस ढ़ंग से मुक्ति मिलेगी।
जग का कलुश भरा हो जिसमें
उस गंगा में कौन नहाए।
मस्त कबीरा कैसे गाये।