स्मृतियों के वातायन से,
झाँक- झाँक कर मुझे रिझाते।
भावों के झरने नि:सृत हो,
तृषित अधर की प्यास बुझाते।।

नयी-नवेली दुल्हनिया के,
ककंण की छन-छन स्वरलहरी।
पैरों में नूपुर,पैंजनिया,
कमर बंधी करधनी सुनहरी।
शुभ प्रभात के अर्चन-वंदन,
रवि का शुभ अभिषेक कराते।

भावों के झरने नि:सृत हो,
तृषित अधर की प्यास बुझाते।।

कहीं प्रणय का भाव हृदय में,
कहीं विरह का क्रंदन भी है।
कहीं वेदना कटुक पलों की,
मर्यादा का बंधन भी है।
संयम-नियम हृदय का चंदन,
नित्य नया आभास कराते।

भावों के झरने नि:सृत हो,
तृषित अधर की प्यास बुझाते।।

विस्मृत सुधियाँ लेकर आयी,
माँ के आँचल की सौगातें।
नटखट सखियों की अठखेली,
पिया मिलन की सौंधी रातें।
ये सब मेरे गीत लाड़ले,
हर पल ही मुझको दुलराते।।

स्मृतियों के वातायन से,
झाँक -झाँक‌ कर मुझे रिझाते।
भावों के झरने नि:सृत हो,
तृषित अधर की प्यास बुझाते