जीने के लिए रोटी
हँसने के लिए चाँद
चाहिए
चाँद छोड़ती हूँ
तो रोटी तो मिलती है

फेंकता उद्दंड श्रद्धा को
सटी आँगन से रसोई में
द्वार की साँकल बजाकर दिन

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