जैसा कि नाम से ज़ाहिर है "तीरगी से लड़ता रहा" तीरगी यानी अंधेरा हमारी राह में आने वाली रुकावटों का प्रतीक है और डॉ राम गोपाल भारतीय की ग़ज़लें उस चिराग़ का प्रतीक हैं,

डा. पुष्पलता अधिवक्ता लेखकीय क्षेत्र में ऐसा नाम है जो अपनी साफगोई के लिए पहचाना जाता है“। दुम टूटने का दुख“ व्यंग्य संग्रह इसी साफगोई को प्रतिबिंबित करता दर्पण है।

डॉ पुष्पलता का हाल में लघु कथा संग्रह "फार्मूला 44" नाम से प्रकाशित हुआ है। इसमें कुल 44 छोटी कहानियाँ शामिल की गई हैं। कहावत है देखन में छोटे लगे घाव करे गंभीर। डॉ पुष्पलता ने अपनी कहानियों के माध्यम से इसे ही चरितार्थ किया है। ये कहानियाँ समाज के अलग-अलग परिदृश्यों, घटनाओं से निकली हुई प्रतीत होती हैं।

 

उपन्यास का शीर्षक प्रथम दृष्टया पाठक को किसी नारी के व्यथित जीवन के कथानक का संकेत देता प्रतीत होता है, किंतु यह कथन छह पुत्रियों के पिता का है जो अपनी पुत्री के प्रति स्नेह व उत्तरदायित्व की अभिव्यक्ति को बल देता है।

पुस्तक : इस समय तक (कविता संग्रह), 2019
लेखक : धर्मपाल महेन्द्र जैन
प्रकाशक : शिवना प्रकाशन

“इस समय तक” चर्चित वरिष्ठ कवि-साहित्यकार श्री धर्मपाल महेन्द्र जैन का प्रथम कविता संग्रह हैं. इसके पूर्व इनका एक व्यंग्य संग्रह "सर क्यों दाँत फाड़ रहा है?"

पुस्तक - "दूब का बन्दा"
लेखिका- "डॉ पुष्पलता "

डाक्टर पुष्प लता अधिवक्ता बहुमुखी प्रतिभा की धनी एक सुपरिचित साहित्यकार हैं। उनका लेखन अनेक विधाओं में है।तीन खंड काव्य सहित उनकी लगभग बीस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।

पुस्तक -"पानी की देह"
लेखिका- "डॉ पुष्पलता अधिवक्ता मुजफ्फरनगर "

प्रख्यात एवं वरिष्ठ लेखिका "डॉ पुष्पलता" का काव्य 'पानी की देह' मुझे pdf के द्वारा मिली, डॉ पुष्पलता एक उच्चकोटि की लेखिका है। आपकी अनेक पुस्तकें मन का चांद, अरे बाबुल काहे को मारे, खंडकाव्य एक और अहल्या, एक और वैदेही, एक और उर्मिला आदि जिनके लिए अनेक पुरस्कार पा चुकी हैं।

अनेक बार "दुक्खम-सुक्खम" पढ़ने की इच्छा हुई क्योंकि जिस कृति को व्यास पुरस्कार मिला वह निश्चित ही अद्भुत होगी इसकी उम्मीद थी। गूगल पर सर्च की नहीं मिली तो ममता कालिया दी से ही पूछा। पता चला प्रतिलिपि डॉट कॉम पर है ।पढ़ना शुरू किया तो लगा ये तो मेरी कहानी शुरू हो गई है।

प्रखर अनुभूतियाँ लिए गर्मजोशी, उतेजना, गहरी भावुकता से अपनी बात कहता है नवगीत। इसमें सहज मार्मिक संवेदना होती है। नवगीत प्रकृति और आधुनिकता से प्रेरणा प्राप्त करता है। कौंधती स्मृतियों के जरिये बिम्ब गहरे उतर जाते हैं मन में।

प्रेम चंद ने सही कहा था "कहानी वह ध्रुपद की तान है जिसमें गायन महफ़िल शुरू होते ही अपनी प्रतिभा दिखा देता है।" मुझे तेजेन्द्र शर्मा की कहानियाँ पढ़ने का अवसर मिला।

सम्पादक मंडल

मुख्य सम्पादक : डॉ. पुष्पलता मुजफ्फरनगर

सह सम्पादक : मिली सिंहराहुल सिंह

प्रबंध सम्पादक : राजेश मंगल

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डॉ पुष्पलता अधिवक्ता मुजफ्फरनगर
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