प्रखर अनुभूतियाँ लिए गर्मजोशी, उतेजना, गहरी भावुकता से अपनी बात कहता है नवगीत। इसमें सहज मार्मिक संवेदना होती है। नवगीत प्रकृति और आधुनिकता से प्रेरणा प्राप्त करता है। कौंधती स्मृतियों के जरिये बिम्ब गहरे उतर जाते हैं मन में।

प्रेम चंद ने सही कहा था "कहानी वह ध्रुपद की तान है जिसमें गायन महफ़िल शुरू होते ही अपनी प्रतिभा दिखा देता है।" मुझे तेजेन्द्र शर्मा की कहानियाँ पढ़ने का अवसर मिला।

"भोर विभोर" अनिता सक्सेना जी का अनुभवों, सुखों दुखों की भावभूमि पर रचा रचना संसार है। जीवन को भोर के रूप में आत्मसात करने वाली रचनाकार की रचनाएँ वास्तव में भाव विभोर करती हैं, उनकी रचनाओं में ऊर्जा, उमंग, मानवीयता है।

डॉ. सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास 'नक़्क़ाशीदार केबिनेट' पढ़ा। स्त्री अस्मिता पर जैसे सम्वेदनाओं की नक़्क़ाशी जड़ दी है। पुस्तक हाथ में लेने के बाद पाठक को पकड़ लेती है। बिना पूरी पढ़े वह उसे रखता नहीं है।

हिंदी की प्रगतिशील कविता भारतीय सामाजिक अंतर्विरोध से पैदा होकर निरंतर गतिशील यथार्थ और परिवर्तित राजनीतिक स्थितियों के घात प्रतिघातों से उत्पन्न हुई है। मुक्तिबोध ने इन घात-प्रतिघातों को बहुत नज़दीक से महसूस किया था। उनकी कविताओं में इसकी गूंज़ हमें बराबर सुनाई देती है। 

कई महीने से रखी आदरणीय वेद प्रकाश "वटुक "की पुस्तकें पढ़ना चाह रही थी। मगर व्यस्त रही। आज उनकी एक कृति "शहीद न होने का दुख" पढ़ी। वेद प्रकाश 'वटुक' जी के पास कल्पनाओं का बहुत बड़ा आकाश है।

साहित्य अपने समय का सहचर नहीं, साक्ष्य भी होता है। विसंगतियों, कुरूपताओं पर उसकी सीधी नजर होती है। चन्द्रशेखर शर्मा ‘शेखर’ के काव्य संग्रह ‘अवसर अभी शेष है’ को पढ़ते हुए यह सच्चाई बराबर कौंधती है कि तमाम कानूनों, दावों और प्रभावों के बावजूद मौजूदा व्यवस्था में स्त्री जाति के हिस्से में यातनाएँ ही यातनाएँ हैं।

कहानियां सभी को अच्छी लगती है। दादी सुनाती है तो ओर भी लुभाती है। बोर हुई तो बच्चों को सुलाती है। मगर, कहानियाँ भाती और लुभाती सभी को है। कारण, इनमें रोचकता और सरसता कूट-कूट कर भरी होती है।

समकालीन कथा साहित्य में नए कलमकार नई उड़ान भर रहे हैं। एक पूरी की पूरी नौजवान पीढ़ी भाषा, शिल्प, कथ्य और अंदाज को लेकर नए प्रयोग कर रही है। स्त्री रचनाकारों की बात करें तो उनका साहस चमत्कृत करता है।

रचना प्रेषित करें

"आखर-आखर" पत्रिका में प्रकाशन हेतु आपकी साहित्यिक लेख, कविता, कहानी, लघुकथा, व्यंग्य, समीक्षा, संस्मरण आदि रचनाएं आमंत्रित है।

प्रकाशन हेतु लेखक अपनी रचना "[email protected]" पर ईमेल कर सकते हैं।

पुस्तक समीक्षा प्रकाशन हेतु पुस्तक की एक प्रति डाक द्वारा निम्न पते पर अवश्य भेजें :

डॉ पुष्पलता अधिवक्ता मुजफ्फरनगर
253-ए, साउथ सिविल लाइन,
मुजफ्फरनगर-251001 (उ.प्र.)

सम्पादक मंडल

मुख्य सम्पादक : डॉ. पुष्पलता मुजफ्फरनगर

सह सम्पादक : मिली सिंहराहुल सिंह

प्रबंध सम्पादक : राजेश मंगल

Go to top

 © सर्वाधिकार सुरक्षित आखर-आखर (हिन्दी वेब पत्रिका) || Powered by Aakar Associates Pvt Ltd