मैं तो समय का एक पीस हूं
मृत शैय्या पर पड़ा सन् दो हजार बीस हूं।
जब मेरा आगमन हुआ, आप सभी ने हैप्पी न्यू ईयर कहा।
अब जरा पता करके बताओ, कौन-कौन हैप्पी रहा?

अपना तो सबसे बड़ा प्रोडक्ट ही कोरोना है,
इसमें से यदि "को" निकाल दिया जाए, तो रोना ही रोना है।
मैंने तो लोगों को चैन की नींद सो ने ही नहीं दिया।
और हैप्पी तो किसी को होने ही नहीं दिया।
आने वाले साल के बारे में क्या कहूं, अभी तो वह अजन्मा बच्चा है।
लेकिन इसमें 21 का आंकड़ा फसा है जो बहुत अच्छा है।
नए साल के अंदर घर घर में आनंद होना चाहिए।
तथा 20-20 तो क्रिकेट भी बंद होना चाहिए।
क्योंकि यह एक बदनाम अंक है।
इसने सभी को लपेटे में लिया है चाहे वह राजा है या रंक है।
कुछ लोग संकट की घड़ी में भी रीति-रिवाजों का बोझ ढोते रहे।
शादी विवाह भी होते रहे,
परंतु रौनक रही फीकी।
दुल्हन की मुंह दिखाई में उसकी आंख ही आंख दीखी।
40% चेहरे पर तो मास्क का अधिकार था।
जिसके आगे बेचारा मेकअप भी लाचार था।
कैसा न्याय किया है तूने, वाह रे न्यायधीश!
बारात में 50 आदमी, श्मशान में बीस!
यहां भी बीस ही आपके मन को भाया,
क्या कोई और अंक नजर नहीं आया?
मैं नहीं जानता, शरीर से निकलकर आत्मा कहां जाती है।
पर कभी-कभी मेरे कानों में एक अजीब सी आवाज आती है।
" यमपुरी को जाने वाले यात्रीगण कृपया ध्यान दें,
अपने-अपने यमदूतों को भरपूर सम्मान दें।
आपकी बॉडी पूरी तरह पॉलिथीन में पैक है,
जो कि डॉक्टरों द्वारा अच्छी तरह से चेक है,
मुंह के अंदर ना गंगाजल है , ना तुलसीदल है,
अगर साथ कुछ है तो वह आपके कर्मों का फल है।
ये इसी जन्म के नहीं अनेक जन्मों के भोग हैं।
इसलिए अंतिम विदाई में भी केवल 20 लोग हैं।
अकड़ कर तुम्हारे शरीर का ऐसा रूप बना है,
कि अब तो इसका मुंह देखना भी मना है।
तुम इस तुच्छ हृदय की दुर्बलता को त्यागो,
और यहां से जल्दी जल्दी भागो,
पुरानी वस्तुओं से मोह रखना बेकार है,
तुम्हारे लिए अब एक नया शरीर तैयार है।
इन बातों को सुन सुन कर कभी-कभी मेरा हृदय भी द्रवित हो जाता।
पर मैं अपनी पीड़ा किसे सुनाता?
हे प्रभु मैं ऐसे दृश्यों से ही डरता हूं,
इसलिए जाते-जाते आपसे यही प्रार्थना करता हूं,

"चेहरा किसी का हो मगर देखें तो वह खुशहाल हो।
संसार में सबके लिए इक्कीसवां, शुभ साल हो ।

निवेदन कर्ता- वर्ष 2020
निवेदन करवाता मेरा प्रवक्ता-गोपाल सिंह राघव