जिम्मेदारियों के पहाड़ ने मनोहर लाल को बीमार कर डाला उनको रात दिन जवान बेटी की शादी और शिक्षित बेटे की नौकरी की चिंता सुकून नहीं लेने दे रही थी।

भिलांचल झाबुआ का छोटा सा कस्बा रामनगर ,जहाँ चार खम्भो पर टिकी बांसों की झोपड़ी में सोमला अपने बुजुर्ग माता पिता के साथ रहता था। सोमला जवान था किंतु निरक्षर जिसे अ अनार का भी याद नहीं।अपनी झोपड़ी के समीप उसका छोटा सा खेत था।

आज अचानक मेरे मित्र का वीडियो कॉल आया और मैं सो कर भी नहीं उठी थी इसलिए मैंने फोन नहीं उठाया। लेकिन जब देखा तो खुद को रोक नहीं पाए और रजाई को पलटकर ब्रश करके तुरंत नीचे हॉल में जाकर उन्हें फोन लगा ही दिया।

घोर कलयुग आ गया है ।एक ही बेटा है और कुछ कमी भी नहीं है,इतनी ज़मीन-जायदाद..... ...?

"राम-राम ऐसा अनर्थ तो न कभी देखा,न सुना।

पहली बार ऐसा अनोखा खेल अपने समाज़ में हो रहा है।

"यार, क्या हॉट लड़की है प्रिया, अब और रहा नहीं जाता; हमें उसका आने जाने का रूटीन पता तो है ही, तो क्यों ना कल उसे किडनैप कर अपनी अपनी प्यास बुझाए?, बोलो क्या कहते हो सब?" मयंक ने अपने दो दोस्तों आलोक और विनय से एक गन्दी हंसी के साथ पूछा।

चिलचिलाती तेज धूप मैं गर्म हवाएं चल रही थी ऐसे खतरनाक मौसम में अर्धनग्न अपने डागले के नीचे बैठा कालूबा बीड़ी पी रहा था सिर के आधे बाल सफेद, शेष सिर सपाट था। आंखें धसी धसी और हाथ पैर किसी लकड़ी की तरह सूखे पतले से।

सम्पादक मंडल

मुख्य सम्पादक : डॉ. पुष्पलता मुजफ्फरनगर

सह सम्पादक : मिली सिंहराहुल सिंह

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