“अनिल, सुनो ना”
“हाँ, कहो”
“हमें कम से कम अब तो मॉम डैड से मिलने जाना चाहिये | पाँच वर्ष हमारे विवाह को हो गए?|
शायद, अब वे मान जाएँ और हमारे प्रेम को समझ सकें |”

शांत जंगल, ऊची, ऊंची पहाड़ियों और उसी पर संकरी पगडंडी का रास्ता जो देवला की झोपड़ी को जाता है। देवला के साथ उसकी पत्नी और दो बच्चे काली और थावरिया भी रहते हैं।

"मैडम, मुझे भी एनुअल डे के कल्चरल प्रोग्राम में पार्टिसिपेट करना है l प्लीज़, मुझे भी ग्रुप डाँस में ले लीजिये l" 12 वर्ष की सातवी में पढ़ने वाली कुषा ने झिझकते हुए अपनी म्युज़िक टीचर से कहाl

"अरे, अब तो ये लोग भी बड़ी, हाई-फ़ाई सोसाइटिज़ में फ़्लैट लेने लगे हैं l" श्रीमती प ने कहा l

"कौन लोग ?" मैंने पूछा l

डमरू ने कागज में लिपटा एक पैकेट नुमा सामान मेरी ओर बढ़ाया और याचक मुद्रा में देखने लगा।

मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वह मुझसे क्या चाहता है।

और लाख कोशिश के बाद भी...प्रतिमा को बचाया नहीं जा सका। प्रतिमा तो पिछले 2 माह से कोमा में है जब से वो बाथरूम में फिसल कर सिर के बल गिर पड़ी थी,

सम्पादक मंडल

मुख्य सम्पादक : डॉ. पुष्पलता मुजफ्फरनगर

सह सम्पादक : मिली सिंहराहुल सिंह

प्रबंध सम्पादक : राजेश मंगल

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